मेरी छोटी कहानी

Hindi Poem on love by kaaya faye, ek ladka aur ek ladki

एक लड़की थी
जिसे देखा था मैंने एक रोज़
एक साल हुआ उस बात को
हवा में उड़ते बादलों से झगड़ती
जा रही थी कहीं
हाथ किसी टीचर की डांट की तरह
बालों को फटकारते जा रहे थे
लेकिन वो घने ज़िद्दी बाल थे कि माने नहीं

दो दिन बाद
वही लड़की फिर नज़र आई
बालों को चोटी में समेटे हुए
मुस्कुराती हुई
सहेलियों के साथ चली जा रही थी
यूँ तो लड़कियाँ पहले भी पसंद आईं थीं
पर किसी को सामने बैठा कर
उसकी आँखों में देखते रहने का
ख़्याल नहीं आया

अब तो मैं रोज़ वहाँ से गुज़रता
क्या पता कब नसीब से
वो भी आ जाए
एक दिन राह में बैठे
मुझे ख़्याल आया

एक लड़के की तस्वीर सी बन गई
जलन, यूँ तो कभी हुई नहीं
पर उस दिन मानो आग सी लग गई हो
दिल झुलस ही गया था बस
कि ठंडी हवा सी
वो दिखाई दी

अकेली कहीं जा रही थी
सोच अच्छा है मौका
आज किसी बहाने बात हो जाए
कि तभी मेरा ख़्याल सामने आता दिखा
लंबे कद का एक लड़का
चला आ रहा था मेरी चाह की ओर

मेरी चाह, वो लड़की
न नाम पता था जिसका
न ही आवाज़ कभी सुनी थी
बस चहरा ही था जिसपे मर मिटा था मैं
फिर भी अपनी सी लगने लगी थी
खुदगर्ज़, स्वार्थी ही कह लो
मगर दिल की बात थी न इसलिए ज़्यादा सोचा नहीं
बस महसूस करता चला गया

दोनों ने कब हाथ में हाथ डाले
और कब रवाना हो गए
कुछ याद नहीं
बस याद है तो मेरा अकेले पीछे रह जाना
और उसका हमेशा के लिए चले जाना
मेरी किस्मत से
पर दिल से नहीं

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