हमसफ़र-ऐ-ज़िन्दगी Guest Poems by Vivek Dhawan

I

कोई तो ऐसा हमसफ़र मिल जाए इस सफर में हमारा।
जिस बिन ना हो सके एक पल का भी गुजारा।
सुख दुःख में हमसे उसको अपने दिल के करीब पाऊ।
जिसके लिए जिन्दगी और भी खूबसूरत बनाऊ।
जो अंधेरों में मुझे चांद सी चमकती रोशनी दिखाये।
और काले घने अंधेरे जैसी हर बुराई से बचाये।
जो विश्वास करने का मेरी जिंदगी में एक कारण हो।
जिसका हर एक रुप सरल और साधारण हो।
प्यार विश्वास और सुकून भरी एक हसीन जिंदगी हो।
मैं उसका और वो मेरी दिल ए नादान बंदगी हो।

II

यूँ जो तुम अपने केशों से दिल चुराती हो, अच्छा लगता है।
यूँ जो तुम धीरे से मुस्कुरा कर चली जाती हो, अच्छा लगता है।
यूँ जो तुम अपनी बातो से खुश कर जाती हो, अच्छा लगता है।
यूँ जो तुम देख के भी नज़र चुराती हो, अच्छा लगता है।
यूं तो दिल में बहुत सी बातें हैं तुम्हें कहने को
पर बिन बोले मेरी हर बात समझ जाती हो, अच्छा लगता है।

आना कभी मिलने कुछ वक़्त निकाल के,
देखना तुम भी कैसे खुद से ज़्यादा तो तुम्हे अपनी आँखों में रखते हैं।

III

इश्क-ए-इन्तजार में बैठे हुए है आज ऐसे
उनके एक दिल-ए-दीदार के लिए यूं तरसे है।
उनके आने का पैगाम सुनकर आज ऐसे
आसमान में बादल भी क्या खूब जोर से बरसे है।
मिलकर आज उनसे यूँ रूबरू ऐसे लगा जैसे
सिर्फ उनके साथ ही इस जंहा में जलसे है।

 

A Little Something About Vivek Dhawan

Vivek Dhawan

 

 

 

 

 

Vivek Dhawan, 24, is a classic poet who molds emotions into poetry and everyday experiences into inspiration. But his favorite muse is the woman he loves. A friend? A girlfriend? Hard to say since all he called her was his lifeline.

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Photo by Molly Belle on Unsplash

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